Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2012

शायरी

"वादा जो मुलाकात का उन्होंने ना निभाया तो हमको ग़म था,  जिसको समझ बैठे थे वो बारिश का मौसम वो समां तो मेरे अश्कों से नम था।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' "यूँ तो ज़िन्दगी के हर गुजरते लम्हें को हमने खोया है, काबिल-ए-तारीफ़ तो तो बस ये है की हर उस गुजरे लम्हे में तेरी यादों को पिरोया है।" -Alok Dixit 'मुख़्तार'