"वादा जो मुलाकात का उन्होंने ना निभाया तो हमको ग़म था, जिसको समझ बैठे थे वो बारिश का मौसम वो समां तो मेरे अश्कों से नम था।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' "यूँ तो ज़िन्दगी के हर गुजरते लम्हें को हमने खोया है, काबिल-ए-तारीफ़ तो तो बस ये है की हर उस गुजरे लम्हे में तेरी यादों को पिरोया है।" -Alok Dixit 'मुख़्तार'
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'