"तारीफ़ तेरी सनम मैं बेहिसाब लिख रहा हूँ, तुझको अपना कल अपना आज लिख रहा हूँ। बहुत से हक़ लिखे है तेरे हिस्से अपने दिल की वसीयत में, बस कुछ इस तरीके से तुझको मैं अपना प्यार लिख रहा हूँ। कल तक ये दिल जो मुख़्तार हुआ करता था, आज मैं इस पर भी तेरा इख़्तियार लिख रहा हूँ।" -Alok Dixit 'मुख़्तार'
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'