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Showing posts from March, 2016

मेरी ज़िन्दगी की ग़ज़ल

"तू मेरी ज़िन्दगी की वो ग़ज़ल है,   जो दर्ज़ है किसी और के पन्नो में।                           लफ्ज़-ब-लफ्ज़ पढ़ा है मैंने तुझे - 2,                          और अपनी ज़िन्दगी में उतारा है।    तू भले ही हो किस्मत में किसी और की,   लेकिन तुझ पर आज भी हक़ हमारा है।  -Alok Dixit 'मुख़्तार'