Friday, 8 January 2016------------------ "हो गया हूँ काफ़िर इस मोहब्बत की कश्मकश में, ना तो अपना ही रहा और ना उसका हो सका।" ---------------------------------------- Friday, 3 June 2016----------------------------------- "जरा एहतियात से कान खोल कर रहा करो मेरे यारों, मैंने सुना है के जब भी टूटता है भरोसा तब कोई आवाज़ नहीं होती।" ----------------------------------------------------- Monday, 4 July 2016-------------------------- "की थी दिल्लगी उन्होंने मोहब्बत के नाम पर, कर के ज़िन्दगी भर का वादा मेरे कुछ पल का साथ ले गए।" --------------------------------------------- -Alok Dixit 'मुख़्तार'
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'