Skip to main content

Posts

Showing posts from May, 2018

हसरत-ए-इश्क़

"तेरे ख्यालों में ग़ाफ़िल ज़माने से बे-ज़ार हो कर,   तेरे इंतज़ार में बैठा है कोई मरने को तैयार हो कर।    हसरत-ए-इश्क़ में मुख़्तार तेरा अब और क्या मुक़ाम होगा,   मुक्कमल ना हुई जो तेरी आरज़ू तो शायद मौत ही अंजाम होगा।    फ़क़त तब बस इतने से ख़ुशी और इतने से आराम होगा,   इस गुमनाम सी मोहब्बत में  मेरा शायद तब थोड़ा नाम होगा।  Alok Dixit 'मुख़्तार'

क़यामत की गोद

"जिन्दगी बहुत छोटी है चलो आज इसको जिया जाए,   बेफिक्र बैठकर तेरे पहलु में अपने हर गम को पिया जाए।   क्यों घबराये मुश्किलों से क्यों अपने दिल की धड़कनो को बढ़ाया जाए।   जब क़यामत की गोद में लेटे है तब क़यामत से क्यों ख़ौफ़ खाया जाए।" Alok Dixit 'मुख़्तार' 

तेरी याद...

"मुद्दतों बाद आज हमको क्यों  याद किया है,   तन्हा ही अच्छे थे अब इन हिचकियों ने बर्बाद किया है।" Alok Dixit 'मुख़्तार'