ना तो किसी के मज़हब से ना किसी के जात से, मैं तो रखता हूँ नाता सिर्फ इंसान के इंसानी जज़्बात से। जो आज के वक़्त में भी रहता इंसान है, बसता उस बन्दे के दिल में ही भगवान् है। -Alok Dixit 'मुख़्तार' 30th January 2013
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'