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Showing posts from January, 2013

इंसानी जज़्बात

ना तो किसी के मज़हब से ना किसी के जात से, मैं तो रखता हूँ नाता सिर्फ इंसान के इंसानी जज़्बात से। जो आज के वक़्त में भी रहता इंसान है, बसता उस बन्दे के दिल में ही भगवान् है। -Alok Dixit 'मुख़्तार' 30th January 2013