----------------------------- Sunday, 1 March 2015 " वो मेरे सोते हुए से दिन थे जागती सी थी रातें , सिर्फ तेरा ही ज़िक्र था और सिर्फ तेरी ही थी बातें। जी भर के खुश होते थे मुस्कुराते थे दिल खोलकर , सब कर देते थे ज़ाहिर तुझसे तुझे कुछ भी ना बोलकर। तेरे इश्क़ की खुमारी मेरे ज़ेहन से ना उतरती थी , वो राते हसीन थी जो तेरी बाहों में गुजरती थी।" --------------------------------------------- -Alok Dixit 'मुख़्तार'
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'