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जागती रातें....

----------------------------- Sunday, 1 March 2015  " वो मेरे सोते हुए से दिन थे जागती सी थी रातें , सिर्फ तेरा ही ज़िक्र था और सिर्फ तेरी ही थी बातें।   जी भर के खुश होते थे मुस्कुराते थे दिल खोलकर , सब कर देते थे ज़ाहिर तुझसे तुझे कुछ भी ना बोलकर। तेरे इश्क़ की खुमारी मेरे ज़ेहन से ना उतरती थी , वो राते हसीन थी जो तेरी बाहों में गुजरती थी।" --------------------------------------------- -Alok Dixit 'मुख़्तार'