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हसरत-ए-इश्क़

"तेरे ख्यालों में ग़ाफ़िल ज़माने से बे-ज़ार हो कर,   तेरे इंतज़ार में बैठा है कोई मरने को तैयार हो कर।    हसरत-ए-इश्क़ में मुख़्तार तेरा अब और क्या मुक़ाम होगा,   मुक्कमल ना हुई जो तेरी आरज़ू तो शायद मौत ही अंजाम होगा।    फ़क़त तब बस इतने से ख़ुशी और इतने से आराम होगा,   इस गुमनाम सी मोहब्बत में  मेरा शायद तब थोड़ा नाम होगा।  Alok Dixit 'मुख़्तार'
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क़यामत की गोद

"जिन्दगी बहुत छोटी है चलो आज इसको जिया जाए,   बेफिक्र बैठकर तेरे पहलु में अपने हर गम को पिया जाए।   क्यों घबराये मुश्किलों से क्यों अपने दिल की धड़कनो को बढ़ाया जाए।   जब क़यामत की गोद में लेटे है तब क़यामत से क्यों ख़ौफ़ खाया जाए।" Alok Dixit 'मुख़्तार' 

तेरी याद...

"मुद्दतों बाद आज हमको क्यों  याद किया है,   तन्हा ही अच्छे थे अब इन हिचकियों ने बर्बाद किया है।" Alok Dixit 'मुख़्तार'  

मेरा दिल और तेरा इख्तियार....

"तारीफ़ तेरी सनम मैं बेहिसाब लिख रहा हूँ, तुझको अपना कल अपना आज लिख रहा हूँ।               बहुत से हक़ लिखे है तेरे हिस्से अपने दिल की वसीयत में,              बस कुछ इस तरीके से तुझको मैं अपना प्यार लिख रहा हूँ। कल तक ये दिल जो मुख़्तार हुआ करता था, आज मैं इस पर भी तेरा इख़्तियार लिख रहा हूँ।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' 

मैं अपनी यादें पीछे छोड़ जाऊँगा.....

"मैं ना तो सोना चाहता हूँ और ना मुझे नींद आये,  ग़र सो जाऊं तो फिर ना कोई मुझे नींद से जगाये।              बेसब्र जो बीत रहा है ये वक़्त इसको बीत जाने दो,             जिसमे छूटेगा मेरा हर रिश्ते से ताल्लुक मेरी वो उम्र आने दो।   कुछ तो लम्हे मिलें यूँही बेवज़ह इस जिंदगी में,  जिनमे सिर्फ मेरा और मेरी ख़ुशी का नाम आये।              बमुश्किल मिलें भले ही 2 पल के लिए,             पर इस उम्र भर की जुस्तजू को कुछ तो आराम आये।   ना तो कोई मेरा अपना मेरे साथ आया था,  और ना कोई मेरा अपना मेरे साथ जाएगा।              कर के सुपुर्द-ए-ख़ाक एक दिन मुझे,             मेरा हर अपना अपने-अपने घर जाएगा।  कुछ की आँखों में शायद आंसू होंगे,  और कुछ को शायद मैं याद आऊंगा।               ख़ाक में मिल जाएगा ...

Love Business

"जो करते थे कलतक उसूलों की बातें,   आज हमने उनको देखा था बीच बाज़ार।                           बेच रहे थे वो सबको अपने हसीन सपने,                          और कर रहे थे जज्बातों का व्यापार।        हम सोती रातों में जागा किये अक्सर,   करते थे जिनके आने का इंतज़ार।                            आज देखा है महफ़िल में यारों उनके हाथों बिकते,                           कौड़ियों के भाव मेरे लाखों का प्यार।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' 

My Moments My Love “Winter Special”

"वो दिसंबर की सर्दी की वो लंबी रातें,   वो मेरी ख़ामोशी और तेरी बाते।                      वो करवटें बदलना और लिखना लव लैटर,                      वो तेरे नख़रे और तेरे गुस्से के मैटर।   वो साँसों में मेरी तेरी साँसों का महकना,   वो तेरे ख्यालों में मेरे दिल का बहकना।                      वो घर से निकलना और पार्क में जाना,                       वो मम्मी डैडी से बहाने बनाना।   वो तुझसे मिलना तुझे सीने से लगाना,   वो अपनी धड़कनों में तुझको बसाना।                      वो दिसंबर की सर्दी की वो लंबी रातें,                      रातों में होती थी वो मोहब्बत की बातें।" -Alok Dixit 'मुख़्तार'