"जो करते थे कलतक उसूलों की बातें,
आज हमने उनको देखा था बीच बाज़ार।
आज हमने उनको देखा था बीच बाज़ार।
बेच रहे थे वो सबको अपने हसीन सपने,
और कर रहे थे जज्बातों का व्यापार।
हम सोती रातों में जागा किये अक्सर,
करते थे जिनके आने का इंतज़ार।
आज देखा है महफ़िल में यारों उनके हाथों बिकते,
कौड़ियों के भाव मेरे लाखों का प्यार।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'

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