तेरी तस्वीर मैं मुझे अपनी तक़दीर नज़र आती है, संग तुम होती हो तो ये ज़िन्दगी थोड़ी अमीर नज़र आती है। वजह की जरुरत नहीं रहती मुझे फिर मुस्कुराने को, तेरे मुस्कुराने से ख़ुशी खुद-ब-खुद मेरे करीब चली आती है। ना ज़माने की फिक्र रहती है ना किसी से कोई वास्ता रहता है, सिर्फ तू रहती है मैं रहता हूँ और तेरा मेरा राब्ता रहता है। तुझ से मिलकर लगता है के अब मेरी आरज़ू-ए-मंजिल पूरी होगी, अकेले तो पूरी जिंदगी कटती है सफर में और आगे बस रास्ता रहता है। - Alok Dixit 'मुख़्तार' https://me-n-my-shayari.blogspot.in/
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'