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Showing posts from July, 2017

गुजरते लम्हे....

अपने हर गुजरते लम्हे में तुझको याद करता हूँ, तेरी यादों के सहारे मैं अपनी तन्हाईयाँ आबाद करता हूँ। लफ़्ज़ों में लिखता हूँ तुझे अपनी शायरी में पिरोता हूँ, अब मैं सिर्फ बाहर से हँसता हूँ पर अंदर से रोता हूँ। तेरे हुस्न का नहीं हुज़ूर मैं तो तेरी मासूमियत से मुत्तासिर था, तू मंज़िल थी मेरी सफर-ए-ज़िन्दगी का और मैं एक मुसाफिर था। वो भी एक वक़्त था वो भी एक दौर था, ज़िन्दगी का मज़ा मेरे यारों उस लम्हे मैं कुछ और था।  -  Alok Dixit  'मुख़्तार'   https://me-n-my-shayari.blogspot.in/

ज़िन्दगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो।

क्यों हर घड़ी मरने की बात करते हो , जिंदगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो। कितना कुछ मिला है अब तक इस सफर में , फिर भी इस रास्ते को तय करने बचते हो आगाज़ पर क्यों अंजाम की फ़िक्र करते हो , ज़िन्दगी है ये इससे इतना क्यों डरते हो। मुश्किलों से टकराकर क्यों इनसे बिखरते हो , क्यों नहीं डटकर हालातों से समर करते हो। कोसते हो खुदा को क्यों ज़माने को बदनाम करते हो , ज़िन्दगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो। जो भी है हासिल उसमे सब्र नहीं , हर वक़्त थोड़ा और मिले ये आरज़ू करते हो। हर कदम पर ठहरते हो हर घड़ी फिक्र करते हो , ज़िन्दगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो। -  Alok Dixit  'मुख़्तार'   https://me-n-my-shayari.blogspot.in/

Shukriya

क्या कहूँ मैं तुझे क्या लिखूँ  मैं तुझे, कौनसी बात से ये कहूँ मैं तुझे, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मेरी ज़िंदगी मैं आने का, इसको हसीं बनाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ दिल में  मेरे बस जाने का, धड़कन मेरी बन जाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मुझको यूँ हसाने का, सताने का रुलाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मुझे इतना ख़ास बनाने का, दिल में तेरे सजाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ -Alok Dixit  'मुख़्तार'