"मैं ना तो सोना चाहता हूँ और ना मुझे नींद आये, ग़र सो जाऊं तो फिर ना कोई मुझे नींद से जगाये। बेसब्र जो बीत रहा है ये वक़्त इसको बीत जाने दो, जिसमे छूटेगा मेरा हर रिश्ते से ताल्लुक मेरी वो उम्र आने दो। कुछ तो लम्हे मिलें यूँही बेवज़ह इस जिंदगी में, जिनमे सिर्फ मेरा और मेरी ख़ुशी का नाम आये। बमुश्किल मिलें भले ही 2 पल के लिए, पर इस उम्र भर की जुस्तजू को कुछ तो आराम आये। ना तो कोई मेरा अपना मेरे साथ आया था, और ना कोई मेरा अपना मेरे साथ जाएगा। कर के सुपुर्द-ए-ख़ाक एक दिन मुझे, मेरा हर अपना अपने-अपने घर जाएगा। कुछ की आँखों में शायद आंसू होंगे, और कुछ को शायद मैं याद आऊंगा। ख़ाक में मिल जाएगा ...
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'