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Showing posts from September, 2017

मैं अपनी यादें पीछे छोड़ जाऊँगा.....

"मैं ना तो सोना चाहता हूँ और ना मुझे नींद आये,  ग़र सो जाऊं तो फिर ना कोई मुझे नींद से जगाये।              बेसब्र जो बीत रहा है ये वक़्त इसको बीत जाने दो,             जिसमे छूटेगा मेरा हर रिश्ते से ताल्लुक मेरी वो उम्र आने दो।   कुछ तो लम्हे मिलें यूँही बेवज़ह इस जिंदगी में,  जिनमे सिर्फ मेरा और मेरी ख़ुशी का नाम आये।              बमुश्किल मिलें भले ही 2 पल के लिए,             पर इस उम्र भर की जुस्तजू को कुछ तो आराम आये।   ना तो कोई मेरा अपना मेरे साथ आया था,  और ना कोई मेरा अपना मेरे साथ जाएगा।              कर के सुपुर्द-ए-ख़ाक एक दिन मुझे,             मेरा हर अपना अपने-अपने घर जाएगा।  कुछ की आँखों में शायद आंसू होंगे,  और कुछ को शायद मैं याद आऊंगा।               ख़ाक में मिल जाएगा ...

Love Business

"जो करते थे कलतक उसूलों की बातें,   आज हमने उनको देखा था बीच बाज़ार।                           बेच रहे थे वो सबको अपने हसीन सपने,                          और कर रहे थे जज्बातों का व्यापार।        हम सोती रातों में जागा किये अक्सर,   करते थे जिनके आने का इंतज़ार।                            आज देखा है महफ़िल में यारों उनके हाथों बिकते,                           कौड़ियों के भाव मेरे लाखों का प्यार।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' 

My Moments My Love “Winter Special”

"वो दिसंबर की सर्दी की वो लंबी रातें,   वो मेरी ख़ामोशी और तेरी बाते।                      वो करवटें बदलना और लिखना लव लैटर,                      वो तेरे नख़रे और तेरे गुस्से के मैटर।   वो साँसों में मेरी तेरी साँसों का महकना,   वो तेरे ख्यालों में मेरे दिल का बहकना।                      वो घर से निकलना और पार्क में जाना,                       वो मम्मी डैडी से बहाने बनाना।   वो तुझसे मिलना तुझे सीने से लगाना,   वो अपनी धड़कनों में तुझको बसाना।                      वो दिसंबर की सर्दी की वो लंबी रातें,                      रातों में होती थी वो मोहब्बत की बातें।" -Alok Dixit 'मुख़्तार'

Love - Pure & Divine

"The day you will think of me,  the day you will think of us.  The day you will live for me,  the day you will breathe for us.  I will be yours & you will be mine,  It will be love pure & divine."       -Alok Dixit 'मुख़्तार'        28/01/2009

जिंदादिल जिंदगी

भरी महफ़िल में हमने छलकते जामों को पीना सीखा है, चोट गहरी हो कितनी भी हमने ज़ख्मों को सीना सीखा है।  चश्म-ए-नम नहीं होते हमारे क्यूंकि हमने अश्कों को पीना सीखा है।  खुशियों में तो मुर्दादिल भी जी लेते है ज़िंदादिल हम है जिसने गम में जीना सीखा है।  - Alok Dixit 'मुख़्तार' 30th December 2012

ख़्वाहिश

आओ आज मोहब्बत का साया ओढ़कर सो जाते है, डूबते है चाहत के दरिया मैं और मदहोशियाँ में खो जाते है।  आओ मिटा देते है अपने बीच की ये दूरी, पूरी कर लेते है हर वो ख़्वाहिश जो अब तक थी अधूरी।  उमड़ जो आया है सैलाब मेरे दिल मई उसको बिखरने तो दे, तेरे हुस्न का ये जगमगाता सूरज आज मेरी बाहों में ढलने तो दे।  इस सब के लिए मुझको बस तेरा साथ चाहिए, अरे मुझे तेरे दिन से क्या मतलब मुझको तो सिर्फ तेरी एक रात चाहिए।  - Alok Dixit 'मुख़्तार' 24/10/09 ****