आओ आज मोहब्बत का साया ओढ़कर सो जाते है,
डूबते है चाहत के दरिया मैं और मदहोशियाँ में खो जाते है।
आओ मिटा देते है अपने बीच की ये दूरी,
पूरी कर लेते है हर वो ख़्वाहिश जो अब तक थी अधूरी।
उमड़ जो आया है सैलाब मेरे दिल मई उसको बिखरने तो दे,
तेरे हुस्न का ये जगमगाता सूरज आज मेरी बाहों में ढलने तो दे।
इस सब के लिए मुझको बस तेरा साथ चाहिए,
अरे मुझे तेरे दिन से क्या मतलब मुझको तो सिर्फ तेरी एक रात चाहिए।
- Alok Dixit 'मुख़्तार'
24/10/09
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