-------------------- Friday, 1 May 2015 "ज़िन्दगी के तजुर्बे तो है कड़वे बहुत, तेरी अदा में तो सनम फिर भी मिठास है। तू दूर है भले ही मेरे आगोश से, पर फिर भी सीने में धड़कता तेरा एहसास है। मेरे इस हालात से निकले इन अलफ़ाज़ से होगा वही मुतास्सिर, जिसके लबों पे तैरती उसके मोहब्बत की प्यास है।" ------------------------------------------ -Alok Dixit 'मुख़्तार'
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'