"आसां नहीं है अपने जज्बातों को लफ्जों में पिरोना, बहुत मुश्किल बाहर से हँसना और अंदर से रोना। खूबसूरत नज़्म लिखता हूँ मैं इस ज़माने को सुनाने को, जिससे कुछ तो मिले लोगो को अपना दिल बहलाने को। ये प्यार इश्क़ और मोहब्बत सब फ़िज़ूल की है बाते, पर जो इन से किनारा कर लिए तो कैसे गुजरेंगी राते। कलम मेरी ये क्या लिखेगी ग़र लिखने को कोई फ़साना ना हो, किसको सुनाऊंगा मैं अपनी गजलें ग़र मोहब्बत में ग़ाफ़िल ये ज़माना ना हो।" Alok Dixit 'मुख़्तार'
दोस्तों ये ब्लॉग मेरी लिखी हुई शायरी और नज़्मों का एक संग्रह है। मैं मुख़्तार के नाम से अपनी शायरी लिखता हूँ, यहाँ इस ब्लॉग पर मेरी लिखी हुई शायरी है आप सभी पढ़े और ग़र अच्छी लगे तो हौसला बढ़ाये और कुछ कमी हो तो इत्तला जरूर करे। आपका Alok Dixit 'मुख़्तार'