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Showing posts from April, 2017

My Poetry - 3

मेरा शायरी संग्रह - 3 My Poetry Collection - 3 ---------------------------------- "बेनतीजा नहीं जाती किसी की मेहनत कभी, कामयाबी मिले न मिले सबक मिल ही जाता है।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' ---------------------------------- -------------------------------------------------- "एक दरिया हूँ मैं हर पल बहता रहता हूँ,            हर मोड़ पर मैं अपनी कहानी कहता हूँ। जो भी सुनता है तसल्ली से उसको सुनाता हूँ,            वरना कइयों को लगता है के मैं सिर्फ शोर मचाता हूँ।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' -------------------------------------------------- --------------------------------------------- #approach matters my friend... "इंसान की तालीम बड़ी हो ना हो, ताल्लुकात बड़े होने चाहिए।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' --------------------------------------------- ------------------------------------------------- "सबके मुताबिक़ जीते जीते मैं अपना खुद का अंदाज़ भुला बैठा, बैठकर खामोशी से सुनता रहा सबकी और अपनी...

My Poetry-2

मेरा  शायरी संग्रह - 2 A Collection of my Poetry - 2 ----------------------------------------------- “वो मेरी जिंदगी की हकीकत है पर उसको मुझ पे ऐतबार नहीं,  शायद इसलिए हर दफा मेरी लकीरो में वो अपना वजूद ढूंढती है।“ -Alok Dixit 'मुख़्तार' ----------------------------------------------- ---------------------------------------------------------- “मोहब्बत की जिरह मे हर दफा अपने महबूब को सच्चाई का सबूत देता हूँ, कभी कभी तो लगता है ज़नाब आशिक़ी नहीं की बल्कि कोई मुकदमा लड़ रहा हुँ।“ -Alok Dixit 'मुख़्तार' ----------------------------------------------------------- --------------------------------------------------- "जीना है जिंदगी को तो जियो एक इत्तिफाक की तरह, ग़र दस्तूर से जिए इसको 'मुख़्तार' तो जीने में मज़ा थोड़ा कम आएगा।" -Alok Dixit 'मुख़्तार' --------------------------------------------------- ------------------------------------------ "गुरूर ना कर ऐ बादल आज जो तू आफताब पे है,  तेरी भी किस्मत का मुक्कम्म...

My Poetry - 1

मेरा शायरी संग्रह A collection of my poetry ----------------------------- " थक गया हूँ अब तो तनहा जीते जीते , ऐ जिंदगी अब तुझसे नाता तोड़ लेता हूँ।"   - Alok Dixit 'मुख़्तार' ----------------------------- ------------------------------------- "मेरी ये ज़िन्दगी सनम एक रेशम की डोर है, जिसका मैं भी एक छोर हूँ और तू भी एक छोर है।" - Alok Dixit 'मुख़्तार' ------------------------------------- ---------------------------------------- "तुम हुए ना मुतास्सिर जिस सफर मैं साथ चल के इतना, उसकी मंज़िल को पाने मैं अब क्या ख़ाक मज़ा आएगा।" - Alok Dixit 'मुख़्तार' ---------------------------------------- ------------------------------------------------------ "क्यों करते हो उम्मीद वफ़ा की मुख़्तार इस बेवफाई के दौर मैं, यहाँ मतलब निकल जाने पर लोग ढूंढ लेते है अपना खुद भी किसी और मैं।" - Alok Dixit 'मुख़्तार' ------------------------------------------------------ --------------------------------...

वो बारिश की बूंदे और मेरी कहानी

“ वो तो ज़िद थी मेरी सनम तुझे अपना बनाने की - २ ,       वरना किस्मत के भरोसे मोहबत्त अपनी मुक्कमल कहा होती।  तेरा दिल जीतने का जुनून था तुझे पाने की ख्वाहिश थी - २ ,       वरना आजतक कहा हमने की किसी से कोई गुज़ारिश थी।  वो तेरे एक लम्हे की आरज़ू थी वो तेरी एक रात का वादा था - २ ,       वरना यूँ रातों को जागने का ना मेरा कोई इरादा था।  वो तुम ना आये थे तो मैं ना रोया था - २ ,       पर तेरे दीदार का इंतज़ार सनम मेरी नज़रो को मुझसे भी ज्यादा था।  वो जो तुमने ना निभाया था मिलने का वादा- २ तो हमको ग़म था ,       जिसमे भीग रहे थे तुम होकर अनजान वो समां तो सनम मेरे अश्कों से नम था। वो बारिश नमकीन थी थोड़ा-थोड़ा नमकीन था उसका पानी ,            क्योंकि उस बारिश की बूंदो से जुड़ी थी मेरी भी कहानी। ” -Alok Dixit 'मुख़्तार'

कश्मकश - Delimma

बाते जितनी भी थी हमने उनसे कही, कुछ वो समझे नहीं कुछ वो माने नहीं।  मेरी खुशियों की थे वो वज़ह बन गए, दिल ने माना नहीं मैंने जाना नहीं।  महफ़िल से हुए थे रुखसत जो वो, वो रुके भी नहीं मैंने रोका नहीं।  चंद क़दमों को चल के जो वो थे थम गए, वो मुड़े भी नहीं ना मैंने आवाज़ दी।  इज़हार और इंकार की कश्मक़श में मैं उलझा रहा, खामोश ही रहा और उनसे कुछ ना कहा।  और कुछ इस तरह से वो मुझसे जुदा हो गए, जाते जाते वो मेरी मोहब्बत मेरे खुदा हो गए।  - Alok Di xit 'मुख़्तार' x

मेरे दिल का चोर- My heart's thief

"वो सावन की बारिश और बारिश का पानी,              वो पानी में लिखी तेरी मेरी कहानी। वो बारिश में भीगा हुआ तेरा बदन,              जैसे मंद मंद हो महकता चन्दन। वो बूंदो की ठंडक और चाहत की गर्मी,              वो तेरे लबों की खुशबू और उनकी नरमी। वो बदलता मौसम और बादलो का ज़ोर,              वो जो तुझे छूकर हवायें बहती थी मेरी ओर। वो जो खुशबू थी तेरी मेरे चारों ओर,              वो बारिश में भीगा था मेरे दिल का चोर।" - Alok Dixit 'मुख़्तार'

Love, is it needed??

"बहुत बदलना पड़ेगा ख़ुद को तेरे पैमानों के मुताबिक़ ,  सोचता हूँ के तुझे पाने का ख्याल ही बदल देता हूँ। किसी एक इंसान को पाना इतना भी नहीं है जरुरी , जिसके चलते अपनी ही शख्सियत से बन जाए दूरी। मैं मुक़्क़म्मल हूँ क्यूंकि मुझे उस अज़ीम खुदा ने बनाया है , यह मोहब्बत की जरुरत का इल्म तो इस ज़माने ने जगाया है। गर ताल्लुकात मुफीद हो तो रिश्ते भी है और जज्बात के नाते भी , मैंने देखा है लोगो को अपनी जरुरत की चलते सजदे में सर झुकाते भी। यहाँ कोई किसी का हमसफ़र नहीं ना किसी को किसी का इंतज़ार , एक दरियाँ सी है ये ज़िन्दगी और सबको जाना है उस पार।" -Alok Dixit ' मुख़्तार'

You are my world

" कब मिलेंगे फिर ना जाने फिर कब मुलाक़ात हो , बस दुआ ये करना के ये ना आखिरी रात हो। तेरा मेरा ये मिलना यूँ ही चलता रहे तो अच्छा , ना तो रुके ये सिलसिला और ना ही दरमियाँ कोई दूरियों की बात हो। यूँ तो कहते है मुख़्तार के यहां ना किसी को मुक्कम्मल जमीं मिली है और ना ही आसमाँ , मेरी किस्मत में रवायत थोड़ा अलग है शायद जो मुझे तू अपना मिला है यहाँ।" -Alok Dixit ' मुख़्तार'

Ghazal By Sahir Ludhiyanvi, Movie - Pyasa-1957

#Sahir Ludhiyanvi ये महलों , ये तख्तों , ये ताजों की दुनिया ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनिया ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनिया ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है             हर एक जिस्म घायल , हर एक रूह प्यासी निगाहो में उलझन , दिलों में उदासी ये दुनिया है या आलम-ए-बदहवासी ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है             जहाँ एक खिलौना है , इंसान की हस्ती ये बस्ती है मुर्दा परस्तों की बस्ती यहाँ पर तो जीवन से मौत सस्ती ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है जवानी भटकती है बदकार बन कर जवां जिस्म सजते हैं बाजार बनकर यहाँ प्यार होता है व्योपार बनकर ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ये दुनिया जहाँ आदमी कुछ नहीं है वफ़ा कुछ नहीं , दोस्ती कुछ नहीं है यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है जला दो इसे , फूँक डालो ये दुनिया मेरे सामने से हटा लो ये दुनिया तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

Story of my love

"आज मैंने अपने अश्कों से जो भी था अपने दरमियान लिखा है,   उसमे थोड़ी मेरी ज़मीन और थोड़ा तेरा आसमान लिखा है। पन्नो मैं मैंने वो राते लिखी है जो हमने साथ गुजारी थी,   उस वक़्त की कुछ बातें लिखी है जिस वक़्त में तू हमारी थी। कुछ पुराने खत हैं जिनमे कुछ मज़मून पुराने है,                कुछ पुराने किस्से है कुछ उस दौर के फ़साने हैं ये सब बहुत पुरानी बातें है बहुत पुराने ज़माने है,   इल्म के इस दौर मैं अब ये दिल बहलाने के कुछ अच्छे बहाने हैं।" -Alok Dixit 'मुख़्तार'