"आज मैंने अपने अश्कों से जो भी था अपने दरमियान लिखा है,
उसमे थोड़ी मेरी ज़मीन और थोड़ा तेरा आसमान लिखा है।
पन्नो मैं मैंने वो राते लिखी है जो हमने साथ गुजारी थी,
उस वक़्त की कुछ बातें लिखी है जिस वक़्त में तू हमारी थी।
उस वक़्त की कुछ बातें लिखी है जिस वक़्त में तू हमारी थी।
कुछ पुराने खत हैं जिनमे कुछ मज़मून पुराने है,
कुछ पुराने किस्से है कुछ उस दौर के फ़साने हैं
कुछ पुराने किस्से है कुछ उस दौर के फ़साने हैं
ये सब बहुत पुरानी बातें है बहुत पुराने ज़माने है,
इल्म के इस दौर मैं अब ये दिल बहलाने के कुछ अच्छे बहाने हैं।"
इल्म के इस दौर मैं अब ये दिल बहलाने के कुछ अच्छे बहाने हैं।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'

heart touching.....
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