मेरा शायरी संग्रह
A collection of my poetry
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"थक गया हूँ अब तो तनहा जीते जीते,
ऐ जिंदगी अब तुझसे नाता तोड़ लेता हूँ।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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"मेरी ये ज़िन्दगी सनम एक रेशम की डोर है,
जिसका मैं भी एक छोर हूँ और तू भी एक छोर है।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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"तुम हुए ना मुतास्सिर जिस सफर मैं साथ चल के इतना,उसकी मंज़िल को पाने मैं अब क्या ख़ाक मज़ा आएगा।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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"क्यों करते हो उम्मीद वफ़ा की मुख़्तार इस बेवफाई के दौर मैं,
यहाँ मतलब निकल जाने पर लोग ढूंढ लेते है अपना खुद भी किसी और मैं।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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"तुमने बेवफाई तो की पर अब ज़रा संभल के रहना मेरे यार,
क्योंकि जब मोहबत्त की थी बेइंतेहा तो नफरत भी सनम बेइंतेहा ही होगी।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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"बड़ी ही तयशुदा उम्र है मेरे खाव्बो की,
ये रातों को शुरू और सुबह को ख़त्म हो जाते है।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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"तुझे पाने की ज़िद करना मेरे ऊपर है,
पर तेरा मिलना तो मुमकिन तेरी रज़ा से ही होगा।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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"ना तो उम्मीद कर किसी से और ना ही किसी की रज़ा ले,
तू बस अपने तरीके से जिये जा और अपनी ज़िन्दगी का मज़ा ले।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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Waah re zindagi tu bhi kya khel rachati hai,
ReplyDeleteKabi apno ko begana kabi begano ko apna bnati hai,
Khuda bhi jane kyun hai deewana is zindagi ka,
Jo ek din sabse bewafa ho jaati hai.
awesome loved it.
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