वरना
किस्मत के भरोसे मोहबत्त अपनी मुक्कमल कहा होती।
तेरा
दिल जीतने का जुनून था तुझे पाने की ख्वाहिश थी - २,
वरना
आजतक कहा हमने की किसी से कोई गुज़ारिश थी।
वो तेरे
एक लम्हे की आरज़ू थी वो तेरी एक रात का वादा था - २,
वरना
यूँ रातों को जागने का ना मेरा कोई इरादा था।
वो तुम
ना आये थे तो मैं ना रोया था - २,
पर तेरे
दीदार का इंतज़ार सनम मेरी नज़रो को मुझसे भी ज्यादा
था।
वो जो
तुमने ना निभाया था मिलने का वादा- २ तो हमको ग़म था,
जिसमे
भीग रहे थे तुम होकर अनजान वो समां तो सनम मेरे अश्कों से नम था।
वो
बारिश नमकीन थी थोड़ा-थोड़ा नमकीन
था उसका पानी,
क्योंकि उस बारिश की बूंदो से जुड़ी थी मेरी भी कहानी।”-Alok Dixit 'मुख़्तार'

waah waah.....
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