वो मेरी ख़ामोशी और तेरी बाते।
वो करवटें बदलना और लिखना लव लैटर,
वो तेरे नख़रे और तेरे गुस्से के मैटर।
वो तेरे नख़रे और तेरे गुस्से के मैटर।
वो साँसों में मेरी तेरी साँसों का महकना,
वो तेरे ख्यालों में मेरे दिल का बहकना।
वो घर से निकलना और पार्क में जाना,
वो मम्मी डैडी से बहाने बनाना।
वो तुझसे मिलना तुझे सीने से लगाना,
वो अपनी धड़कनों में तुझको बसाना।
वो दिसंबर की सर्दी की वो लंबी रातें,
रातों में होती थी वो मोहब्बत की बातें।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'

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