Skip to main content

ज़िन्दगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो।





क्यों हर घड़ी मरने की बात करते हो,
जिंदगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो।

कितना कुछ मिला है अब तक इस सफर में,
फिर भी इस रास्ते को तय करने बचते हो

आगाज़ पर क्यों अंजाम की फ़िक्र करते हो,
ज़िन्दगी है ये इससे इतना क्यों डरते हो।

मुश्किलों से टकराकर क्यों इनसे बिखरते हो,
क्यों नहीं डटकर हालातों से समर करते हो।

कोसते हो खुदा को क्यों ज़माने को बदनाम करते हो,
ज़िन्दगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो।

जो भी है हासिल उसमे सब्र नहीं,
हर वक़्त थोड़ा और मिले ये आरज़ू करते हो।

हर कदम पर ठहरते हो हर घड़ी फिक्र करते हो,
ज़िन्दगी है यह इससे इतना क्यों डरते हो।



Alok Dixit 'मुख़्तार' 
https://me-n-my-shayari.blogspot.in/

Comments

Popular posts from this blog

Shukriya

क्या कहूँ मैं तुझे क्या लिखूँ  मैं तुझे, कौनसी बात से ये कहूँ मैं तुझे, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मेरी ज़िंदगी मैं आने का, इसको हसीं बनाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ दिल में  मेरे बस जाने का, धड़कन मेरी बन जाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मुझको यूँ हसाने का, सताने का रुलाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मुझे इतना ख़ास बनाने का, दिल में तेरे सजाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ -Alok Dixit  'मुख़्तार'

Love - Pure & Divine

"The day you will think of me,  the day you will think of us.  The day you will live for me,  the day you will breathe for us.  I will be yours & you will be mine,  It will be love pure & divine."       -Alok Dixit 'मुख़्तार'        28/01/2009

Love, is it needed??

"बहुत बदलना पड़ेगा ख़ुद को तेरे पैमानों के मुताबिक़ ,  सोचता हूँ के तुझे पाने का ख्याल ही बदल देता हूँ। किसी एक इंसान को पाना इतना भी नहीं है जरुरी , जिसके चलते अपनी ही शख्सियत से बन जाए दूरी। मैं मुक़्क़म्मल हूँ क्यूंकि मुझे उस अज़ीम खुदा ने बनाया है , यह मोहब्बत की जरुरत का इल्म तो इस ज़माने ने जगाया है। गर ताल्लुकात मुफीद हो तो रिश्ते भी है और जज्बात के नाते भी , मैंने देखा है लोगो को अपनी जरुरत की चलते सजदे में सर झुकाते भी। यहाँ कोई किसी का हमसफ़र नहीं ना किसी को किसी का इंतज़ार , एक दरियाँ सी है ये ज़िन्दगी और सबको जाना है उस पार।" -Alok Dixit ' मुख़्तार'