"तारीफ़ तेरी सनम मैं बेहिसाब लिख रहा हूँ,
तुझको अपना कल अपना आज लिख रहा हूँ।
बहुत से हक़ लिखे है तेरे हिस्से अपने दिल की वसीयत में,बस कुछ इस तरीके से तुझको मैं अपना प्यार लिख रहा हूँ।
कल तक ये दिल जो मुख़्तार हुआ करता था,
आज मैं इस पर भी तेरा इख़्तियार लिख रहा हूँ।"
-Alok Dixit 'मुख़्तार'
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