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March 2015
"वो मेरे सोते हुए से दिन थे
जागती सी थी रातें,
सिर्फ
तेरा ही ज़िक्र था और सिर्फ तेरी ही थी बातें।
जी भर के
खुश होते थे मुस्कुराते थे दिल खोलकर,
सब कर
देते थे ज़ाहिर तुझसे तुझे कुछ भी ना बोलकर।
तेरे
इश्क़ की खुमारी मेरे ज़ेहन से ना उतरती थी,
वो राते
हसीन थी जो तेरी बाहों में गुजरती थी।"
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-Alok Dixit 'मुख़्तार'

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