Skip to main content

मेरी ज़िन्दगी की ग़ज़ल


"तू मेरी ज़िन्दगी की वो ग़ज़ल है,
  जो दर्ज़ है किसी और के पन्नो में। 
                         लफ्ज़-ब-लफ्ज़ पढ़ा है मैंने तुझे - 2,
                         और अपनी ज़िन्दगी में उतारा है। 
  तू भले ही हो किस्मत में किसी और की,
  लेकिन तुझ पर आज भी हक़ हमारा है। 

-Alok Dixit 'मुख़्तार'
                          

Comments

Popular posts from this blog

Shukriya

क्या कहूँ मैं तुझे क्या लिखूँ  मैं तुझे, कौनसी बात से ये कहूँ मैं तुझे, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मेरी ज़िंदगी मैं आने का, इसको हसीं बनाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ दिल में  मेरे बस जाने का, धड़कन मेरी बन जाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मुझको यूँ हसाने का, सताने का रुलाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ मुझे इतना ख़ास बनाने का, दिल में तेरे सजाने का, शुक्रिया है तुझे शुक्रिया - २ -Alok Dixit  'मुख़्तार'

Love - Pure & Divine

"The day you will think of me,  the day you will think of us.  The day you will live for me,  the day you will breathe for us.  I will be yours & you will be mine,  It will be love pure & divine."       -Alok Dixit 'मुख़्तार'        28/01/2009

Love, is it needed??

"बहुत बदलना पड़ेगा ख़ुद को तेरे पैमानों के मुताबिक़ ,  सोचता हूँ के तुझे पाने का ख्याल ही बदल देता हूँ। किसी एक इंसान को पाना इतना भी नहीं है जरुरी , जिसके चलते अपनी ही शख्सियत से बन जाए दूरी। मैं मुक़्क़म्मल हूँ क्यूंकि मुझे उस अज़ीम खुदा ने बनाया है , यह मोहब्बत की जरुरत का इल्म तो इस ज़माने ने जगाया है। गर ताल्लुकात मुफीद हो तो रिश्ते भी है और जज्बात के नाते भी , मैंने देखा है लोगो को अपनी जरुरत की चलते सजदे में सर झुकाते भी। यहाँ कोई किसी का हमसफ़र नहीं ना किसी को किसी का इंतज़ार , एक दरियाँ सी है ये ज़िन्दगी और सबको जाना है उस पार।" -Alok Dixit ' मुख़्तार'