Tuesday, 8 July 2014---------------------------------
"किसी को ज़मीन नहीं मिलती तो किसी को आसमाँ नहीं मिलता,
हम खोजते है जिसको वो शायद यहाँ नहीं मिलता।
है हसीन हज़ारों यूँ तो इस ज़माने में,
पर अफ़सोस मेरे दिल को कोई कद्रदां नहीं मिलता।
ये दौर मोहब्बत का नही तिज़ारत का है मेरे यारों,
यहाँ सच्ची मोहब्बत को दिलों का आशियाँ नहीं मिलता।"
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"किसी को ज़मीन नहीं मिलती तो किसी को आसमाँ नहीं मिलता,
हम खोजते है जिसको वो शायद यहाँ नहीं मिलता।
है हसीन हज़ारों यूँ तो इस ज़माने में,
पर अफ़सोस मेरे दिल को कोई कद्रदां नहीं मिलता।
ये दौर मोहब्बत का नही तिज़ारत का है मेरे यारों,
यहाँ सच्ची मोहब्बत को दिलों का आशियाँ नहीं मिलता।"
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-Alok Dixit 'मुख़्तार'

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